अरविन्द “आप” को बचाए!!!!

आदरणीय अरविन्द जी,

आम आदमी पार्टी एक एसी पार्टी जिसने पेहली बार बुद्धिजीवियो को किसी राजनैतिक पार्टी से जुडने के लिए प्रोत्साहित किया| भारी तादात मे जहॉ पढा लिखा यूवा वर्ग आगे आया| देश विदेश के हिन्दुस्तानी भारत वर्ष की रजनैतिक विरासत मे बदलाव के लिए आगे आए| पहली बार किसी पार्टी मे देखा गया कि दो कार्यकर्ता के मिलने पर नमस्कार की जगह वन्देमातरम् और जय हिन्द का उच्चारण शिष्टाचार मे उपयोग होने लगा|
पेहली बार देश की राजनैतिक पार्टी के प्रचार के लिए लोगो ने अपने पेट काट कर पैसे दिए|
पार्टी द्वारा दिखाए गए सपनो के लिए यूवाओ ने अपनी शिक्षा और नौकरी ताक पर रख दी|
मगर आज एक छोटी सी मॉग के लिए पार्टी दो धडो मे बटती जा रही है| शाज़िया जी जो बात कह पार्टी से अलग हुई, जिस बात को कविता के माध्यम से न जाने कितनी बार कुमार विश्वास ने कहा, जिन बातो से आहत हो योगेन्द्र जी ने अपना इस्तीफा तक पार्टी को दे दिया और जिस बात की मॉग के लिए पार्टी के सिपेसहलार करण सिह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया वह बात थी पार्टी मे स्वराज स्थापित करने की| ये वह नाम है जो पार्टी मे जाने पहचाने है एसे कई और भी नाम है जो पार्टी के लिए तो महत्वपूर्ण थे पर लोगो की नज़र मे वे नही आए जो आज पार्टी मे नही है| पार्टी के शुरूवाती दौर मे जो ब्यूरोकेट, रिटायर्ड IAS अफसर, गैर सरकारी संस्थान जुडे थे वे आज लोगो की भीड मे गुम हो चुके है| जिन आन्दोलकारियो को डूंढने के लिए आपने आन्दोलन के समय भारत भ्रमण किया वे अब खुद को ठगा सा महसूस कर रहे है| देश को जोडने के लिए देशवासियो का साथ होना ज़रूरी है|
आपकी एक बात और आहत कर देने वाली है पार्टी या आपका कोई भी आलोचक आपकी नज़र मे क्यूँ पार्टी विरोधी और बी जे पी का एजेन्ट हो जाता है|आपके इस वक्तव्य का आज पार्टी समुदाय मे यह असर हुआ कि सभी कार्यकर्ता एक दूसरे पर इस तरह के लालछन लगाते दिखाई देते हैं| कोई व्यक्ति किसी भी अच्छे कार्य करने की पहल करे तो उस पर महत्वकांक्षी और पद प्राप्ति के प्रयास का आरोप लग जाता है|
हमारे देश मे एक कहावत है बच्चे माँ बाप और बडो से ही सीखते है| अब जिस तरह की भाषा का प्रयोग आप अपने विरोधी और आलोचको के लिए कर रहे है वैसा ही प्रयोग आज छोटा कार्यकर्ता भी कर रहा है|
आप सभी को गाँधी जी के मार्ग पर चलने की सलाह देते है| मगर गाँधी जी ने कभी भी किसी से अपने पूरे जीवन मे एसी बात नही की| गाँधी जी दुश्मन को सीने से लगाना नही भूले जबकि उस समय तो दुश्मन भी अंग्रेज थे| आज आप के विरोधी और आलोचक दोनो ही देशवासी है| आपकी छवि एसी होनी चाहिए कि दूसरे खेमो मे भी आपकी तारीफ की सुकबुगाहट रहे| दूसरी पार्टी के लोग भी आपसे जुडने के लिए तरसे| आपका दिल बडा होना चाहिए जहॉ हर कार्यकर्ता, देशवासी,आलोचक और विरोधी सभी के लिए जगह हो|
पार्टी का एक बहुत बडा खेमा पार्टी मे आन्तरिक स्वराज की मॉग कर रहा है| उनकी नीयत पर शक न कर उन्हे बुला उनकी तकलीफ को जाने व समझे| जिस स्तर पर भी यह कार्य हो सकता हो उसे स्वीकार कर पार्टी मे स्थापित करे|
जो न हो सके उसे मना कर कारण बता दें| इससे आपके प्रति लोगो मे समर्पण की भावना और बडेगी|

नमन तुम्हे
निशांत यादव
Mitul ( Mann ) Bhatt
गुजरात||

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4 Responses to अरविन्द “आप” को बचाए!!!!

  1. Chandan Kishore July 22, 2014 at 9:36 am #

    My simple and straight question : Why Mr.Karan Singh did not work in Haryana and implemented AVAM there?
    Why he was more interested in national level?

    Why they are not satisfied with Mission Vistaar?

    • Swaraj July 22, 2014 at 4:51 pm #

      AFAIK there was hope the party will improve on its own but the way they are working it doesn’t look like. The important question for you to answer is:
      – Do you want Swaraj in AAP or NOT? If yes, then when and how?
      – Do you want us to know what decisions are taken in NE & PAC through media or via AAP?
      – Do you want honest, dedicated, selfless, efficient volunteers to rise up AAP and others to be given feedback?
      – Do you want to be heard in the party or you are ok staying mute and dumb?
      – How will change come in the party?

      Do you think without any processes in place Mission Vistaar can succeed? I doubt it.

  2. nagu July 22, 2014 at 10:00 am #

    If Karan Singh is really honest, why he is trying to create difference within AAP for his selfish interest?

    • Swaraj July 22, 2014 at 4:55 pm #

      Is he really trying to create a difference. AVAM is saying they are with AAP. Do all of you understand that? What do you do when leadership stops listening to you? What will you do? You keep shouting & crying for months and nobody listens or replies to you. Ask yourself, who has heard you for last 6-8 months. Have you ever got any clear replies to your queries?

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