एक कार्यकर्ता की अनसुनी कहानी..

Sohan

क्या “आप” जानते हैं कि इस फोटो में हॉस्पिटल के बिस्तर पर जो शख्स हैं वो कौन हैं?

शायद आप नहीं जानते। चलो मैं ही बता देता हूँ। ये हैं आम आदमी पार्टी के एक कार्यकर्त्ता सोहन के पिताजी हैं जो किसी गंभीर बीमारी के शिकार हैं और काफी समय से हॉस्पिटल में हैं। सोहन  ने अपनी जॉब छोड़ दी थी जिससे कि वो देश के सिस्टम को सुधारने का सपना दिखने वाली आम आदमी पार्टी को अपना पूरा समय दे पायें। ये देशभक्त पार्टी के साथ ऐसा जुड़ा कि अपने पिताजी के हॉस्पिटल में होते हुए भी पार्टी के लिए दिन रात एक कर दिया, धरने पर बैठा। पिता के इलाज के लिए पैसों की कमी आई तो दोस्तों ने सहायता मिली और काम चला।

अब सवाल ये है कि क्या आम आदमी पार्टी में कार्यकर्ता  की कोई पहिचान है? कोई उनको सुनता है कि नहीं? आर्थिक रूप से तो छोडो नैतिक सहायता भी कोई देता है?
अगर आवाम ने जो मुद्दे उठाये है और उनका समाधान दिया है वो पार्टी में लागू होते तो किसी कार्यकर्ता को जब भी किसी तरह की सहायता की जरुरत होती तो उस तक ये सहायता एक दिन में नहीं बल्कि एक घंटे में पहुच जाती।
जब आवाम कार्यकर्ता की समस्याओं के समाधान के साथ ‘आप’ को और अधिक मजबूत बनाना चाहता है तो इसका विरोध क्यों?

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