पाक बॉर्डर से आया भारत माँ का एक लाल।

पाक बॉर्डर से आया भारत माँ का एक लाल। 

चोखा राम चौधरी , उम्र करीब 22 -23 साल (कद 5′ 9” के करीब ) एक हँसमुख जवान युवा जो राजस्थान के बाड़मेर ज़िले में पाकिस्तान बोर्डर के पास का रहने वाला था , उसने अभी अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी करी ही थी की दिल्ली में भर्ष्टाचार के खिलाफ आम आदमी पार्टी ने बिगुल बजा कर अपनी चुनावी गतिविधियाँ प्रारम्भ कर दी। बचपन से देश प्रेम की भावना को मन में पाले बैठे इस युवक का खून भी खोलने लगा , अपने आप को अधिक रोक नहीं पाया और घर परिवार में एसएससी की कोचिंग की बात कह कर , चार कपडे बैग में डाल कर निकल पड़ा बॉर्डर से दिल्ली की ओर भारत माता को भर्ष्टाचार से मुक्त करवाने।
दिल्ली पहुँच कर साधारण कद काठी के इस युवा ने दिल्ली की गलीयो में झाड़ू को अपने सर पर रख कर इतना घुमाया जितना शायद एक बाप अपने बच्चे को भी ना घुमा पाये। उसके नारों से दिल्ली की पतली -पतली गालियाँ गूँज उठती थी ,सब को हैरत होती थी की क्या जज्बा है वरना कद काठी देख कर लगता नहीं था की ये बुलँद आवाज इसी युवा की है। चोखा राम के गले ने दो तीन दिन में ही उसका साथ छोड़ दिया। लेकिन हौसला इतना था की उसके नारे दिन प्रतिदिन ओर तेज होते गये ,बस हाथ में गले के लिए लौंग , काली मिर्च , इलाइची और कोई कुछ भी बता दे वो ही रखने लगा।
choka ramएसएससी की क्लास के लिए तो कभी जा ही नहीं सका , दिल्ली की गलियो में हाथ में झाड़ू , मुँह में लौंग , पैरो में छाले और जबान पर भारत माता की जय के नारों के साथ चोखा राम की कोचिंग हो रही थी। उनको ना किसी नेता से मिलने की ललक थी और ना ही राजनीति से कोई मोह , बस एक जज्बा था , एक इच्छा थी कुछ करने की देश के लिए , मर मिटने की भारत माता के लिए और उसी धुन में दिल्ली के चुनाव सम्पन हुए। ऐसे देशभक्तों की मेहनत रंग लाई , आम आदमी पार्टी की जीत हुई।
लेकिन चोखा राम तब तक इस खुशी में शामिल होने के लिए ना दिल्ली में था, ना ही वापिस बाड़मेर पहुँचा बस कहीं दूर जा चुका था, और जाता भी क्यों ना अब पार्टी में उनको कोई पूछने वाला नहीं था। अब बहुत से नए-नए लोग आने लगे थे ,सेठ , व्यपारी बड़ी बड़ी गाड़ियां , उनमे कुछ अच्छे लोग होते तो कुछ राजनैतिक लोग जिनको अब अपना मतलब आम आदमी पार्टी में नजर आ रहा था।
लेकिन जनता के उस नए सैलाब में आम आदमी पार्टी ने अपने कुछ बेसकीमती मोती खो दिए ,जिनको जिनको पिरोया जा सकता था , समेटा जा सकता था। पर वो मोती अब खो चुके थे बिछुड़ चुके थे। बस उनके वो नारे रह गए है जो उनकी पहचान बन चुके थे।

… ”अरे जाग गया भई जाग गया , आम आदमी जाग गया” …….
…… ” भाग गया भई भाग गया , भर्ष्टाचारी भाग गया ”……
……… ” भारत माता की जय” ……………

क्या आ सकते है वो मोती वापिस ? शायद कभी नहीं। और अगर कहीं कुछ सम्भावना है भी तो कोई एक आवाज तो दो उनको …………. शायद वो फिर ………

चोखा राम चौधरी जी  का फेसबुक लिंक 

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