AAP के ड्रामेबाज़ : गन्ने के पेड़ से लटकर आत्महत्या दिखाने की कोशिश

क्या आपने कभी किसी को गन्ने के पेड़ से लटक कर आत्महत्या करते देखा है ? देखने को छोडिये सोचा भी है कि ऐसा हो सकता है ? क्या आत्महत्या करने वाला आदमी जमीन पर गमछा लगाकर गले में फंदा लगाया हुआ देखा है | तो ये देख लीजिये किस तरह ड्रामेबाजी की भी बेईज्ज़ती करने की पूरी ठान ली है इन लोगो ने जिन लोगो ने राजनीती की बेईज्ज़ती करके के लिए राजनीती में कदम रखा था | सरदार पटेल से लेकर बाबा साहब तक राजनीतिज्ञ थे और इन्होने राजनीती को अपने परिवार और अपने राज्य से आगे बढाकर देशहित में सोचने का जरिया बनाया था | बीच में कुछ भ्रष्ट लोगो ने इसको गन्दा करा और अब केजरीवाल के चमचे इसको बेईज्ज़त कर रहे हैं | 

ड्रामेबाजी में हमने आशुतोष को भी टीवी पर रोते देखा था जब कुमार विशस के साथ एक दिन पहले गजेन्द्र की मौत पर “लटक गया, लटक गया ” कहकर तमाशा बना रहे थे और बात बिगड़ जाने पर मगरमच्छ बनकर टीवी पर रोने आ गए थे | इलेक्शन के दौरान दारु पीकर अंकित लाल गंगा में पेशाब कर रहा था जो उसको मदन लाल ने मुहैया करायी थी तब उसको एक लड़की ने थप्पड़ मारा और उसने इस बात का इलज़ाम लगाया कि सपा वाले उनको पीट कर चले गए | इसी मदन लाल को भी अवाम ने स्टिंग करके पर्दाफाश करा था जब वो दारू और मीट के बदले झुग्गी के लड़कों को रेल्ली में लाकर दूसरी पार्टी की महिला कार्यकर्ताओं को छेड़ने की कोशिश कर रहा था |

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