अरविन्दजी के भाषण से : चुनिन्दा तर्क

अगर आपने श्रीमान केजरीवाल का भाषण देखा हो और इन बातों को सुनकर भी अनसुना कर दिया हो तो कृपया दोबारा ध्यान दें |

  1. दो लोगो ने आपस में बात करी, एक वालंटियर “सत्या” था और दूसरा योगेन्द्र यादव जी का “असिस्टेंट”| बातों बातों में, असिस्टेंट ने सत्या को बोला कि केजरीवाल में भी कुछ कमियां हैं | केजरीवाल ने इसको एक बड़ा मुद्दा माना और योगेन्द्र यादव को पार्टी से निष्काषित कर देने का फरमान सुना दिया| यहाँ केजरीवाल ने साफ़ कर दिया कि उसको एक तिनके के बराबर भी निंदा बर्दाश्त नहीं है, और चाहे ये बात योगेन्द्र जी ने खुद न कही और केजरीवाल ने खुद न सुनी हो मगर फिर भी यादव जी को निष्काषित करना था तो इसी बात पर कर दो | क्यूंकि अब पूरी सत्ता केजरीवाल के पास है तो वो बाकि सभी गणमान्य व्यक्तियों को ठिकाने लगाने का कैसा भी बहाना बनायेंगे और सबको उनकी बात माननी भी होगी |  
  2. भाषण में केजरीवाल ने कहा कि हवाला फंडिंग उजागर होने के बाद PB / YY ने टीवी पर तो उनका बचाव करा मगर पार्टी के अंदर उन्होंने इसकी जांच होने वाली ईमेल डाली और लोकपाल से जांच करवानी चाही | जांच अंदरूनी हो या बाहरी, केजरीवाल के हिसाब से उसका सवाल ही पैदा नहीं होना चाहिए और अगर लोकपाल जांच करता और सच्चाई सामने आ जाती तो उनको को स्तीफा देना पड़ता और केजरीवाल स्तीफा आखिर क्यों दे? इसलिए दोनों को पार्टी से निकाल देना चाहिए | इस बात को सबको एक कड़े निर्देश की तरह भी दे दिया गया है कौंसिल मेम्बेर्स को कि जांच के बारे में कोई भी अपना मुह खोलेगा तो उसका यही हश्र होगा |
  3. केजरीवाल ने नेशनल कौंसिल के भाषण के दौरान कहा की, बैंगलोर से आने वाले दिन से लेकर 26 तारिख तक मामला सुलझाने की पूरी कोशिश करी है मगर बाकि दोनों सुलझाना नहीं चाहते थे | शायद केजरीवाल ये भूल गए कि टीवी पर जो स्टिंग चल रहा है जिसमें वो भद्दी भद्दी गलियां दे रहे हैं वो 26 से चार दिन पहले की है | मगर अंधभक्तों को इससे क्या ?
  4. केजरीवाल ने कहा कि योगेन्द्र यादव और प्रशांत भूषण ने सहीराम को चोर कहा, अमनातुल्ला को सांप्रदायिक कहा, भावना गौर को चोर कहा, राजेश यादव को भी चोर कहा | इस बात का केजरीवाल के पास कोई सबूत तो नहीं है और न ही कभी किसी वालंटियर ने YY / PB के मुह से ऐसी कोई बात सुनी है मगर AK ने कह दिया मतलब कह दिया | इसको सच मानो और इनको पार्टी से निकाल दो |
  5. केजरीवाल ने भाषण में कहा कि हमारे दस दागी उम्मीदवारों की शिकायतें टाइम्स ऑफ़ इंडिया और बाकि मीडिया को अंदर के कुछ लोगों ने ही दी है, उनका मानना है कि मीडिया की इतनी औकात नहीं है कि वो खुद थाने जाकर तहकीकात कर उनकी शिकायतों का पता लगा सकें | मीडिया ने जो कुछ भी पार्टी की कमियां प्रकाशित करी है वो सभी की सभी अंदर के लोगो ने ही दी है और आम आदमी पार्टी ने कैसे भी उम्मीदवार चुनाव में उतार दिए हो उनपर बोलने या उनकी तहकीकात करने का अधिकार न मीडिया के पास है, न पुलिस के पास और न ही लोकपाल के पास | ऐसे तर्क देकर, कुछ भी कैसे भी मुद्दे बनाकर खुदको महात्मा और YY/PB को दोषी करार दे दिया| कुछ मेम्बेर्स ने अंधभक्तों की तरह हर बात पर जमकर ताली पीटी और शोर मचाया | जिन दस उम्मीदवारों को केजरीवाल ने बचाया था उन्होंने केजरीवाल की जय जयकार में घसीटकर ले जाते हुए रमजान जी के पीछे से लात भी मारी और अश्लील टिप्पणियां भी करी जिसकी रिकॉर्डिंग पार्टी वालो ने डिलीट भी कर दी |
  6. केजरीवाल ने कौंसिल की मीटिंग में खुद कहा कि जून 2014 में उन्होंने अपने परिवार वालो से बात करके राजनीती छोड़ने का मत बना लिया था मगर जैसे ही इसका पता पड़ा तो प्रशांत भूषण और योगेन्द्र यादव सुबह-सुबह 6 बजे उनके घर पहुंचे और उनको दिल्ली के चुनाव लड़ने के लिए राजी कर लिया (घोर पाप कर दिया उन्होंने )| केजरीवाल के मुताबिक वो सिर्फ इसी बात पर राजी हुए कि दिल्ली के सभी फैसले सिर्फ और सिर्फ वो खुद लेंगे तभी चुनाव लड़ेंगे और दोनों ने दुखी मन से ये बात मान भी ली थी | अब क्यूंकि सारे फैसले केजरीवाल ने लिए हैं और दिल्ली का चुनाव जीता भी है इसलिए उनको पार्टी में वापस लाने वालों को बाहर का रास्ता दिखा देना चाहिए, अब उनकी कोई जरुरत नहीं रह गई है  |
  7. वोटिंग होने से पहले अगर ये कह भी दिया गया है कि “या तो ये दोनों रहेंगे या मैं अकेला और अगर मेरे पक्ष में फैसला नहीं आया तो मेरे 67 MLA को लेकर अलग पार्टी बना लूँगा” तो इसमें लोकतान्त्रिक प्रक्रिया की हत्या कहाँ से हुई? आम आदमी पार्टी कोई कांग्रेस या भाजपा थोड़े ही है ? ऐसी कोई बात कांग्रेस या भाजपा में कहकर तो बताये, हम अलग तरह की राजनीती करने आये हैं |
  8. प्रशांत भूषन और योगेन्द्र यादव ने आवाम को सुना जिसका संयोजक करन सिंह है और उसको इसलिए निकाला था क्यूंकि वो स्वराज-स्वराज सारे दिन किया करता था | करन सिंह को तो हमने कब से भाजपा का आदमी वाला आरोप लगाकर रखा है , वैसे इतने दिनों में, इतने लोगों को लगाकर भी एक छोटा सबूत भी नहीं मिल पाया है जो करन सिंह को भाजपा से जोड़ सके मगर उससे क्या होता है | हमने एक  SMS भिजवाया था करन सिंह के नाम से और उस SMS को मुद्दा बनाकर करन सिंह को पार्टी से भी निकाला था| अब करन सिंह ने खुद पुलिस में रिपोर्ट करके SMS भेजने वाले का नाम निकलवा लिया है और ये पता भी पड़ गया है कि वो SMS  करन सिंह ने नहीं बल्कि  दिलीप पाण्डेय और दुर्गेश ने दीपक से भिजवाया था मगर, इससे क्या होता है? उसकी सुनवाई ही मत करो वो कभी अपनी बात को साबित ही नहीं कर पायेगा |ये दोनों चाहते हैं कि कोई भी अगर सबूत लेकर सामने आये तो उसको सुना जाए इसलिए सबसे पहले इनको ही बिना सबूत के पार्टी से निकाल देते हैं और पूछते हैं कि बताओ अब तुम्हारी सुनवाई कौन करेगा ?
  9. लोकपाल का कार्यकाल तो बहुत पहले ख़तम हो गया था जी मगर एडमिरल रामदास को हटाने का अब इसलिए सोचा क्यूंकि उनपर हम दबाव नहीं बना पा रहे थे और हमको लग रहा था कि जो मार पीट हमको करनी थी रमजान जी के खिलाफ उसपर जांच ही न बैठा दें, अब हम दुसरे पार्टियों की तरह बेवक़ूफ़ थोड़े ही हैं जी | हमको पता है कि जबतक नए लोकपाल को पुराने वाले अपना कार्यभार नहीं देते तबतक पुराने वाले को अपना काम करते रहना चाहिए मगर किस्में हिम्मत है जो हमको इसके लिए बाधित करे? 
  10. प्रशांत भूषण और योगेन्द्र यादव के खिलाफ तो दो चार उलटे सीधे इलज़ाम भी लगाये हैं मगर हमने पूरी कौंसिल से हस्ताक्षर दो के नहीं चार लोगो के निष्कासन पर करवा लिए हैं, पूरी कौंसिल इमानदार है जी, किसीने भी ये नहीं पुछा और न ही हमने किसी ईमेल या SMS से उनको बताया कि इन दोनों को भी क्यों हम निकाल रहे हैं | ऐसा कोई कांग्रेस भाजपा में थोड़े ही हो सकता है | हम तो नयी तरह की राजनीत करते हैं जी 
  11. स्वराज नाम की जब किताब मैंने लिखी है तो फिर राज तो मेरा ही चलेगा न, इतनी सी बात समझने में आपको समस्या क्या हो रही है ? अब आपको ये समझना चाहए की स्वराज दो अक्षरों से मिलकर बना है “स्व” मतलब “मैं” मतलब “केजरीवाल” और “राज” का मतलब तो राज है ही | सभी जान लो स्वराज का मतलब ही केजरीराज है| कोई लोग ये बोल रहे हैं कि रमजान को घसीटने- पीटने से गुंडाराज आ गया, ये एकदम गलत है |
  12. केजरीवाल के अनुसार, एक उम्मीदवार ऐसा भी था जिसको वो टिकेट देना चाहते थे और उसकी छवि भी काफी साफ़ सुथरी थी, उसपर कोई केस भी नहीं था मगर उसको टिकेट नहीं दी क्यूंकि पुलिस वालो ने बताया कि उसके सभी काम दो नंबर के हैं और वो एक सफेदपोश बदमाश है जो जुए और अवैध दारू का धंधा करता है  | केजरीवाल ने ये नहीं बताया कि सत्ता में आने के बाद उस तथाकथित बदमाश पर उन्होंने क्या एक्शन लिया | कहीं ऐसा तो नहीं कि लोगो को बेवक़ूफ़ बनाने और अपने आदर्श का ढिंढोरा पीटने के लिए ही उन्होंने ये मनघडंत कहानी बना ली जिसपर उनको जमकर तालियाँ भी मिली ?

Author: Prof. Yashwant Choudhary

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