AVAM cannot be ignored

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कुछ मुठ्ठी भर कार्यकर्ताओ की टोली देश की सबसे ईमानदार पार्टी का ढंका बजाने वाली पार्टी मे से उसकी अनैतिक कार्यशैली के कारण पार्टी के बाहर आ पार्टी के सुधार के लिए खडी हो गई| पार्टी के वरिष्ठतम नेताओ ने इन पर मनगडंत आरोप लगाए मगर ये अपनी बात पर टिके रहे| न जाने कितनी तकलीफो आरोपो के बावजुद इन लोगो ने अपनी बात को लोगो तक पहुचाने की पुरजो़र कोशिश की| मगर लोगो ने नहीं सुना| आज पार्टी से निकाले गए दिग्गज ईमानदार नेताओ ने वही बातें दोहराई जिन्हे आवाम पिछले ८ महिने से दौहरा रहा था| अब लोगो को लग रहा है कि आवाम जो कह रहा था वह सच था| आम आदमी पार्टी परिपक्व पार्टी नही है| यहाँ भी चापलूसो की बाड़ है| पार्टी मे सुधार का भरसक प्रयत्न भी किया गया| लेकिन जिस पार्टी के सत्ताधीश सत्ता के नशे मे चूर हों उन्हे किसी भी तरह समझाया नही जा सकता|
आवाम को समझना अत्यन्त ही आसान है| यहाँ कोई नेता नही है सभी कार्यकर्ता हैं जो अपने हक मांगते हैं| वही हक जो कभी पार्टी रोड पर खडी हो सरकारों से जनता के लिए मांगा करती थी| कार्यकर्ता जीवन बडा ही संघर्षशील रहता है जहाँ वह रोड पर खडा हो नारे लगाता पोस्टर चिपकाता है पुलिस की मार खाता है जेल जाता है अपना घर परिवार नौकरी जिसकी दूसरी वरियता होती है| एसे मे एक नेता जीत के बाद उसकी महनत को ही दर्किनार एसे कई निर्णय ले लेता है जो उन्ही कार्यकर्ता को पसंद नही आते| पार्टी के हर निर्णय मे कम से कम कार्यकर्ता का मत अनिवार्य होना चाहिए| पार्टी मे चुनाव के समय न जाने कितने दल बदलू पार्टी मे घुस अपना मतलब साधते हैं जिन नेताओ का कार्यकर्ता पिछले समय मे विरोध कर रहा था वर्तमान मे उनकी जयजयकार करनी पडती है| एसे नेताओ की न तो विचारधारा होती है न ही कार्यशैली बस वे लोग पार्टी मे अपना हित साधने के लिए घुस जाते हैं और विपरीत परिस्तिथि मे पार्टी को छोड दूसरे खेमो मे चले जाते हैं|
आवाम एसे लोगो का पुर्ण रूप से विरोध करता जिसकी विचारधारा न हो वह जनता की विचारशैली पर कैसे समझ सकता है|
आवाम मे आज रोज़ लोगो का रुझान बड रहा है| और वह दिन दूर नही जब पार्टियो को कार्यकर्ता की बात सर्वोपरी रखनी होगी|

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