Pathak Tells it all wrong! Hilarious

जब हर कोई अपनी मनघडंत कहानी बनाकर केजरीवाल को सौ फीसदी सच्चे होने का सर्टिफिकेट बाँट कर पार्टी में मलाई पोजीशन लेने में लगा हुआ है तो इन मोहतरमा ने ऐसी मनघडंत कहानी बनायी कि जिसने भी सुना उसकी हंसी छूट गई मगर साथ ही प्रवक्ताओं की जान पर बन आई |

शुरुवात में ये कहती हैं कि प्रशांत भूषन जी ने और योगेन्द्र यादव जी ने मीडिया में तरह तरह के बयान दिए थे तो इसके लिए उनसे नहीं बल्कि कार्यकारिणी उल्टा केजरीवाल से स्पष्टीकरण मांग रही थी | शायद ये भूल गई कि इनको “स्पष्टीकरण” नहीं बल्कि “संबोधन” बोलना था  

ये कह रही हैं कि केजरीवाल का मीडिया में आया हुआ भाषण फर्जी है क्यूंकि असली भाषण में रमजान भाई ने दो तीन बार बाधित करा था जिसकी वजह से उनको सिर्फ समझाया गया था और बाद में दो व्यक्ति उनको लेकर बाहर की तरफ गए और उनके पीछे संजय सिंह भी बाहर गया और रमजान भाई को वापस लेकर आया |

उसके बाद ये कहती हैं कि रमजान भाई जब वापस आ गए और उन्होंने खुद बोला कि मीटिंग आगे चलाओ तो ही मीटिंग आगे चली | ऐसा कहकर उन्होंने ये दर्शाने की कोशिश करी है कि असली दबंगई रमजान भाई की ही चल रही थी और जब रमजान भाई ने बोला कि मीटिंग आगे चलाओ तो ही मीटिंग आगे चली |

मोहतरमा ये कह रही हैं कि रमजान भाई ने जब उनको उनका भाषण पूरा करने दिया तब, केजरीवाल ने भाषण पूरा करा और साथ ही सभी पदों से स्तीफा भी दे दिया | इनके अनुसार जो टीवी पर केजरीवाल की धमकी चल रही है जिनमें केजरीवाल ये कह रहे हैं कि या तो इन दोनों को रख लो नहीं तो में अपने एम् एल ले लेकर अलग पार्टी बना लूँगा वो क्लिप नकली है |

हंगामे को लेकर ये कह रही हैं कि अरविन्द जब मीटिंग से चले गया उसके बाद ही हंगामा हुआ (इन्होने जो ऊपर रमजान भाई वाली बात कही वो फिर हंगामा नहीं था? पार्टी तो उसको ही हंगामा कह रही है) खैर, और फिर वो कहती हैं कि हंगामा इस बात को लेकर हंगामा हुआ कि केजरीवाल स्तीफा क्यूँ दे रहा है | पार्टी के सभी प्रवक्ता इनके अनुसार बिलकुल झूठ बयान दे रहे हैं और मीडिया भी इनके अनुसार बिलकुल झूठ ख़बरों में दिखा रहा है कि हंगामा केजरीवाल के जाने से पहले हो चुका था | वैसे हंगामा कर कौन रहा था ये नहीं बताया इन्होने मगर इन्होने ये बता दिया कि जब रमजान भाई को घसीटकर दो लोग बाहर ले जा रहे थे तो पीछे से उनपर हमला किसने किया था

सबसे बड़ा खुलासा करते हुए और संजय सिंह को ठेंगा दिखाते हुए ये कह रही हैं कि कोई जबरन हस्ताक्षर नहीं लिए गए बल्कि प्रस्ताव तो ध्वनि मत से पास हुआ था | इनकी सुनाई ऊपर की कहानी के अनुसार तो केजरीवाल अपना स्पष्टीकरण दे रहे थे और प्रस्ताव अचानक से ही PB YY और अन्य दो के खिलाफ आ गया | और ये प्रस्ताव किसने दिया ? गोपाल राय जो अध्यक्षता कर रहे थे उनको तो बोलने तक का कोई मौका नहीं मिला था |

इनके अनुसार YY और PB ने जब बोलने की कोशिश करी तो किसीने उनको बोलने नहीं दिया क्यूंकि सबका कहना था कि उनको वो पहले ही सुन चुके हैं | यहाँ पर वो ये बताना ही भूल गई कि पूरे घटनाक्रम में बाकि जो दो लोग थे वो कहानी में भी नहीं थे उनके खिलाफ प्रस्ताव कहाँ से टपक पड़ा |

इस बात को बोलकर इन्होने पूरी पार्टी को शर्मिंदगी वाली स्तिथि में ला दिया है कि परिषद् की सदस्य होते हुए भी इनको बाकि लोगों के बारे में कुछ पता ही नहीं था बस हंगामा करना है यही पता था |

बाउंसर के बारे में अत्यंत बड़ा खुलासा करते हुए ये कह रही हैं कि ये कोई बाउंसर नहीं हैं बल्कि शुरू से ही पार्टी में मैनेज करने वाले कार्यकर्ता है | शायद ये उस फोटो को भूल गई जो आवाम ने अपनी पोस्ट में लगाईं हुई है जहां एक बाउंसर मीटिंग के अंदर एक वृद्ध की गुद्दी पकड़कर उसको खींच रहा है क्यूंकि वो गलती से VIP की सीट पर बैठ गया था |

 

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jhooth

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