Save AAP: Volunteer’s Voice

आवाम द्वारा आदमी पार्टी मे विभाजन की चिंता आज वास्तविक रूप लेती नजर आ रही है|

लोकसभा चुनावो की करारी हार के बाद देशभर के कार्यकर्ताओ को एक जुट करने तथा वैकल्पिक राजनीति के लिए नए यूवाओ को प्रोत्साहित करने के लिए आम आदमी पार्टी मे एक अभियान शुरू किया गया था जिसका नाम था आवाम aam aadmi party volunteer action manch. जिसमे पार्टी से मांग रखी गयी थी किसी भी बडे निर्णय के लिए जिस तरह पार्टी जनता दरबार लगाती है उसी तरह पार्टी के सक्रीय कार्यकर्ताओ का मत भी लिया जाए| इससे पार्टी को नए सुझाव मिलेंगे व चंद लोभी व्यक्तियो की मनमानी से पार्टी को बचाया जा सकेगा| इस अभियान मे पार्टी को नए नेतृत्व क्षमता खोजने मे भी सहायता मिलेगी व चुनाव के समय दलबदलुओ पर केवल महत्वकांक्षा पूर्ती के लिए पार्टी मे जुडने पर रोक लगेगी| आवाम कार्यकर्ता पर हो रहे अन्याय व तकलीफो को दूर करने मे सहियोग करेेगा| nishant

मगर इस अभियान पर निजि हितो को साधने के लिए रोक लगा दी गई व इन से जुडे लोगो को गद्दार बता बाहर का रास्ता दिखा दिया गया|  करण सिंह जिसने इस अभियान को बनाने के लिए बडी भूमिका निभाई उस पर यह कह कर देशद्रोही का इल्ज़ाम लगाया गया कि वे बीजेपी के एजेंट हैं|
और पार्टी को हराना चाहते हैं| कुछ बुद्धीजीवी उनके कार्य को बाहरी रूप मे तो सराहते रहे मगर आगे आ उनका साथ देने के लिए तैयार नही हुए| आवाम के नाम से पार्टी के ही प्रमुख नेताओ ने झूठे sms भी चलाए जिन पर कानूनी कार्यवाही करते हुए यह पता लगा की यह भ्रांति पार्टी के ही कुछ कुंठित समझ के लोगो की उपज है| आवाम पर लगाए गए आरोपो दी गई धमकियो की शिकायत को जब पार्टी के कानून प्रभारी प्रषांत भूषण को सोपी गई तो उन्हे पार्टी के ही आलाकमानो द्वारा किसी भी तरह की तहकीकात करने से रोक दिया गया| योगेन्द्र यादव भी आवाम को गलत बताते नहीं थके| शाज़िया इल्मी भी सिर्फ भीड जुटने का इन्तज़ार करती रही| एसे हालात मे पार्टी से ही सीख लेते हुए आवाम सडक पर आ जनंतर मंतर पर प्रदर्शन करने लगा| यह मुहिम बडने लगी तो पार्टी के ही कुछ संक्ष्पित मानसिक सोच के लोग पहले आवाम के साथ जुडने व इस लडाई को आगे बडाने का ड्रामा कर साथ जुडे व चंदा दिलाने के बहाने स्टिंग कर पार्टी के सभी कार्यकर्ताओ मे बदनाम किया| मगर आवाम ने अपना धैर्य नही खोया| जिस पार्टी की नींव की ईंट अपने हाथो से लगाई हो उसे उजडता कोई भी व्यक्ति नही देख सकता| पार्टी मे आए विधानसभा के दौरान काला धन का चंदा आज तक पार्टी किससे लिया सत्यापित नही कर पाई|

दिलिप पांडे द्वारा लोकसभा चुनावो मे लगवाये गए बैनर पर पार्टी ने अपनी आँखे बन्द ही रखीं|

न जाने कितने लोग जो आवाम को कभी गलत समझ रहे थे जब आज उन पर बीती तो इसे गंदी राजनीति का हिस्सा बता रहे हैं|

जिन को महत्वकांक्षा थी वे विधानसभा के दौरान या तो आवाम का स्टिंग कर विघायक बन गये या बीजेपी मे उच्च पदो की लालसा से जुड गये पर आवाम टस से मस नही हुआ|
आज आवाम के मुद्दे को पार्टी के लोकपाल के साथ सभी रुष्ठ नेताओ ने उठाया तो उन पर ही इल्ज़ाम लगा दिया गया कि आवाम योगेन्द्र व भूषण जी द्वारा बनाया गया| कभी पार्टी आवाम को बीजेपी व कांग्रेस का एजेंट कहती है कभी योगेन्द्र के हाथो की कठपुतली|
मगर आवाम आज यह सभी संकुचित मांनसिकता के पदाधिकारियो को बता देना चाहता है कि आवाम आम आदमी पार्टी के उन कर्मठ जुझारू कार्यकर्ताओ का मंच है जो न तो पार्टी को टूटने देंगे और न ही किसी भी झुंड द्वारा थोपे गए अध्यादेशो को सहेगें| यह पार्टी कार्यकर्ताओ के खून से सीची गई है जिस पर किसी भी एकल व्यक्ति या झुंड का अधिकार नही हो सकता| 
इस पार्टी की सोच ने कार्यकर्ताओ को साथ जोडा था और उस सोच के साथ छलावा कभी भी स्वीकारा नही जाएगा| पार्टी मे स्वराज व कार्यकर्ता के हक महत्वपूर्ण हैं जिन्हे आवाम लेकर रहेगा|

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल मे है
देखना है जोर कितना बाजुए कातिल मे है
वक्त आने पर बता देंगे तुझे ए आसमा
हम अभी से क्या बताए क्या हमारे दिल मे है।

निशांत की कलम से …

 

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